{"product_id":"cinema-ke-vividh-sandarbh-paperback-surabhi-biplov-and-prof-manmohan-chaddha-paperback-surabhi-biplov-and-prof-manmohan-chaddha","title":"CINEMA KE VIVIDH SANDARBH (?????? ?? ????? ??????) [Paperback] Surabhi Biplov (????? ??????) and Prof. Manmohan Chaddha [Paperback] Surabhi Biplov (????? ??????) and Prof. Manmohan Chaddha","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e Surabhi Biplov (सुरभि विप्लव)\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBrand:\u003c\/b\u003e Anuugya Books\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e paperback\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eNumber Of Pages:\u003c\/b\u003e 152\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 01-12-2020\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eDetails:\u003c\/b\u003e फ़िल्म स्वप्न की तरह है, संगीत की तरह है। यह कलारूप जिस तरह हमारी चेतना को प्रभावित करता है, कोई अन्य कलारूप नहीं कर सकता। यह भावनाओं के हमारे घर में, आत्मा के अंधेरे कमरों में सीधे और गहरे प्रवेश करता है। – इंगमार बर्गमैन फ़िल्म छवि है, फ़िल्म शब्द है, फ़िल्म गति है, फ़िल्म नाटक है, फ़िल्म कहानी है, फ़िल्म संगीत है – फ़िल्म में मुश्किल से एक मिनट का टुकड़ा भी इन सब बातों को एक साथ दिखा सकता है। – सत्यजित रे कोई भी सिनेमा में कैमेरे के विशिष्ट महत्व से इंकार नहीं कर सकता। किन्तु कोई भी कैमरे को ही महत्व नहीं दे सकता, वस्तुतः उस दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर ही मूल्यांकन किया जा सकता है, जिससे भावना और बुद्धि अपने अन्तरिम परिणाम से प्रभावित होते हैं, क्योंकि अंततः सिनेमा लोगों के लिए बनाया जाता है। – ऋत्विक घटक एक निर्देशक की भूमिका में अभिनेताओं का प्रशिक्षण, सिनेमैटोग्राफी, साउंड रिकार्डिंग, कला–निर्देशन, संगीत, संपादन, डबिंग और साउंड–मिक्सिंग शामिल होती है। यद्यपि इन्हें अलग–अलग व्यवसायों के रूप में माना जा सकता है, मैं इन्हें स्वतंत्र नहीं मानता। मैं उन सभी को निर्देशन के नीचे एक साथ घुलते –मिलते हुए देखता हूँ। – अकीरा कुरोसावा सुवर्ण रेखा फ़िल्म अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाती है। दर्शक एक बार इस फिल्म को तन्मयता से देख ले तो वह बेचैन हो जाए और हमेशा के लिए उसकी स्मृतियों में यह फिल्म रच बस जाए जैसा मेरे साथ भी हुआ इस फिल्म को देखने के बाद मैं सो नहीं पाई। बार-बार मन घटक जी से प्रश्न करता रहा कि अंत ऐसा क्यों ? काश इसे बदला जा सके! लेकिन नहीं यही इसकी विशिष्टता है कि दर्शक के हृदय को झकझोर दे, उसे बेचैन करे। आप इसके अवलोकन के बाद सहज रह नहीं पाएंगे । यही कारण है कि ऋत्विक घटक की फिल्मों में यह फिल्म सचमुच सोने की लकीर है। ... इसी पुस्तक से\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePackage Dimensions:\u003c\/b\u003e 9.0 x 6.0 x 0.5 inches\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi\u003c\/p\u003e","brand":"Anuugya Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":66901236056368,"sku":"DRG.AnuugyaBooks_B08N6Y2QQV","price":150.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/71Q77b4IdkL.jpg?v=1780573049","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/bn\/products\/cinema-ke-vividh-sandarbh-paperback-surabhi-biplov-and-prof-manmohan-chaddha-paperback-surabhi-biplov-and-prof-manmohan-chaddha","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}