{"product_id":"ajeeb-aadmi-1","title":"Ajeeb Aadmi","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e Ismat Chugtai\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBrand:\u003c\/b\u003e Rajkamal Prakashan\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e paperback\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eNumber Of Pages:\u003c\/b\u003e 198\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 03-05-1972\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eDetails:\u003c\/b\u003e मंगला चोट खाई नागिन की तरह पलटकर ख़ुद ही को डसने लगी। उसके पति ने, जो उसका आशिक भी था, माशूक भी, उसके नारीत्व को ठुकराया था। उसके प्यार का अपमान किया था। उसकी कला का गला घोंट दिया था। कभी उसकी आवाज गली-कूचों में गूँजा करती थी, ख़ुद को सारी दुनिया पर छाई हुई महसूस करती थी। अब उसके गाने कभी-कभी ही रेडियो पर सुनाई देते। दुनिया ने उसे ज़‍िन्दा ही दफ़न करना शुरू कर दिया था। और इस कफ़न-दफ़न में धर्म—उसके पति का हाथ सबसे आगे था। अपनी फ़‍िल्मों के लिए रिज़र्व करके, फिर एकदम दो कौड़ी की एक लड़की जरीन की ख़ातिर उसे दूध की मक्खी की तरह निकल फेंका। आख़‍िर मंगला अपने अस्तित्व की रक्षा में सफल हो सकी? धर्मदेव और जरीन के प्यार का क्या हुआ? क्या वह परवान चढ़ सका; क्‍या फिर मंगला और धर्मदेव का मिलन हो सका? बहुचर्चित-प्रशंसित लेखिका इस्मत चुग़ताई का एक रोमांटिक उपन्यास है—‘अजीब आदमी’। इस उपन्यास में लेखिका ने फ़‍िल्म-जगत की रंगीनियों की यथार्थ झाँकी बड़ी बेबाकी से प्रस्तुत की है। बेहद रोचक और पठनीय उपन्यास।\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEAN:\u003c\/b\u003e 9788119028856\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePackage Dimensions:\u003c\/b\u003e 8.4 x 5.5 x 0.4 inches\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":66908201976112,"sku":"DRG.UnboundDistribution_9788119028856","price":249.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/811D2c95hfL.jpg?v=1780769907","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/bn\/products\/ajeeb-aadmi-1","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}