{"product_id":"adab-mein-baaeen-pasli-afro-asiayi-laghu-upanyas-vol-3","title":"Adab Mein Baaeen Pasli : Afro-Asiayi Laghu Upanyas : Vol. 3","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e Nasera Sharma\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBrand:\u003c\/b\u003e Rajkamal Prakashan\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e hardcover\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eNumber Of Pages:\u003c\/b\u003e 304\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 10-10-2017\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePart Number:\u003c\/b\u003e 9386863081\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eDetails:\u003c\/b\u003e साहित्य की दुनिया में उत्कृष्ट रचनाओं की कमी नहीं है। उसमें से अनुवाद के लिए कुछ भी उठाना जितना सरल है, उतना ही कठिन भी! खासकर तब जब योजना किसी एक देश तक सीमित न होकर कई देशों के बीच फैली हो।उपन्यास 'आधी रात का मुकदमा’ का अनुवाद मैंने अंग्रेज़ी से किया। कहानी कहने का अंदाज़ जटिल था। कुछ शब्द मैंने जानबूझकर उस परिवेश के रहने दिए ताकि वहाँ की हल्की महक पाठ में बसी रहे।उर्दू में उपन्यास का चयन करना मुश्किल था। अपनी पसंद के सारे महत्त्वपूर्ण उपन्यास हिंदी में आ चुके थे| तब मेरी नज़र से 'निसाई आवाज़’ [ज़नानी आवाज़] गुज़री तो मैं असमंजस में पड़ गई। मेरी इस योजना में यह तय था कि देश तो बार-बार दोहराए जाएँगे मगर लेखक नहीं। इस लिए खुद से एक लंबे संवाद के बाद आगा बाबर की कहानी 'गुलाबदीन चिट्ठीरसाँ’ को खंड तीन से हटाकर उनका उपन्यास ले लिया।मेरा अनुवाद किया उपन्यास 'बुफ-ए-कूर’ (अंधा उल्लू) है, जो सादिक हिदायत की महत्त्वपूर्ण रचना है।यह तीनों उपन्यास लगभग साढ़े तीन वर्षों में, मैंने अनुवाद किये। लगातार तो काम नहीं किया, क्योंकि एक साथ मैं कई पुस्तकों पर काम कर रही थी। एक में अटकती तो दूसरे पर अपना ध्यान केंद्रित कर देती। मुझे नहीं पता मेरे पाठकों को यह तीनों उपन्यास पसंद आते हैं या नहीं! मगर मुझे सिर्फ इतना पता है कि ये तीनों लेखक और तीनों उपन्यास अपने समय के चर्चित, महत्त्वपूर्ण उपन्यास हैं जिनकी गूँज उनके देश और विदेश में आज भी साहित्य-प्रेमियों के बीच सुनाई पड़ती है।\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEAN:\u003c\/b\u003e 9789386863089\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePackage Dimensions:\u003c\/b\u003e 8.0 x 5.4 x 1.0 inches\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":66901906981168,"sku":"DRG.UnboundDistribution_9789386863089","price":688.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/71wXVSZeVEL.jpg?v=1780596857","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/bn\/products\/adab-mein-baaeen-pasli-afro-asiayi-laghu-upanyas-vol-3","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}